कौन हैं IAS शेखर आनंद? 16 किमी साइकिल चलाकर दिया फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग के बाद बने IAS, सादगी और पारदर्शी प्रशासनिक शैली के लिए हैं चर्चित
नई दिल्ली/शेखपुरा। बिहार के शेखपुरा जिले के जिलाधिकारी (डीएम) शेखर आनंद इन दिनों अपनी सादगी और अलग कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2018 बैच के अधिकारी शेखर आनंद ने अपने सरकारी आवास से बरबीघा तक करीब 16 किलोमीटर साइकिल चलाकर लोगों को स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उनकी इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की।
कौन हैं IAS शेखर आनंद?
शेखर आनंद का जन्म 11 मार्च 1987 को हुआ था। वे 2018 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और बिहार कैडर से जुड़े हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है।

वर्तमान में वे 10 दिसंबर 2025 से बिहार के शेखपुरा में जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे निदेशक पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
कई अहम पदों पर दे चुके हैं सेवाएं
शेखर आनंद इससे पहले रोहतास में उप विकास आयुक्त (DDC) के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके बाद 25 जनवरी 2024 को उन्हें नालंदा का नगर आयुक्त बनाया गया। उनके कार्यकाल में बिहारशरीफ स्मार्ट सिटी की कई लंबित परियोजनाओं को गति मिली। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग सुधारने के लिए भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल की, जिसकी व्यापक सराहना हुई।

अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम शेखर आनंद ने अधिकारियों को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनसमाधान पोर्टल और सहयोग पोर्टल पर लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण, दिव्यांगजनों के UDID कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज करने और जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश दिए। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति थानों के निर्माण कार्य में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
सादगी बनी पहचान
शेखर आनंद अपनी सरल जीवनशैली और जनहित केंद्रित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सरकारी आवास से बरबीघा तक 16 किलोमीटर की साइकिल यात्रा के माध्यम से उन्होंने लोगों को नियमित व्यायाम अपनाने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उनकी इस पहल को प्रशासनिक सेवा में सकारात्मक नेतृत्व और जनसंपर्क का उदाहरण माना जा रहा है।











